थर्ड आउटर रिंग रोड के भूमि अधिग्रहण पर किसानों का आक्रोश
उचित मुआवजे और पारदर्शी प्रक्रिया की मांग; ड्रोन-जीपीएस सर्वेक्षण तत्काल रोकने की मांग
नागपुर : - किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर कांग्रेस के नेतृत्व में निकाले गए जनआक्रोश मोर्चे के दौरान नागपुर जिले की 9 तहसीलों सहित पारशिवनी तहसील क्षेत्र से होकर प्रस्तावित थर्ड आउटर रिंग रोड के लिए किए जा रहे भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों में भारी नाराजगी देखने को मिली। उचित मुआवजा नहीं मिलने तथा प्रशासन द्वारा कथित रूप से एकतरफा कारवाई किए जाने के विरोध में किसान संघर्ष समिति, किसान बिग्रेड, बलिराजा शेतकरी संगठन सहित विभिन्न किसान संगठनों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने रामटेक के उपविभागीय अधिकारी (SDO) तथा भूसंपादन अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में पारदर्शिता बरतने की मांग की।
किसानों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि प्रभावित किसानों की सूची संबंधित ग्राम पंचायतों के नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक रूप से लगाई जाए। किसानों द्वारा पूर्व में दिए गए शिकायत एवं आपत्ति पत्रों पर चर्चा के लिए बैठक आयोजित की जाए तथा प्रशासन द्वारा किसानों को दिए गए आश्वासनों पर गंभीरता से विचार कर उचित निर्णय लिया जाए। किसानों ने आरोप लगाया कि पूर्व सूचना और पर्याप्त चर्चा के बिना खेतों में पहुंचकर ड्रोन एवं जीपीएस के माध्यम से जमीन की माप, सीमांकन और मार्किंग की कारवाई की जा रही है। किसानों ने इस कार्रवाई का कड़ा विरोध करते हुए ड्रोन एवं जीपीएस के माध्यम से किए जा रहे सर्वेक्षण को तत्काल रद्द करने की मांग की है।
किसानों के अनुसार, थर्ड आउटर रिंग रोड से प्रभावित किसानों की सूची पूर्व में ग्राम पंचायतों में प्रकाशित की गई थी। इसके बाद 3 जून 2026 को किसानों ने अपने आक्षेप एवं शिकायतें प्रशासन के समक्ष दर्ज कराई थीं। उस समय प्रशासन की ओर से किसानों के साथ बैठक कर उनकी समस्याओं पर चर्चा करने तथा उचित मुआवजे के संबंध में निर्णय लेने का आश्वासन दिया गया था। किसानों का आरोप है कि आश्वासन के बावजूद उनकी मांगों पर अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। किसानों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण जैसी गंभीर प्रक्रिया में प्रशासन को किसानों को विश्वास में लेकर आगे बढ़ना चाहिए। बिना उचित चर्चा, आपत्तियों के निराकरण और मुआवजे का निर्धारण किए खेतों में जाकर सर्वेक्षण एवं मार्किंग करना किसानों के हितों के खिलाफ है।
किसान संघर्ष समिति, किसान बिग्रेड और बलिराजा शेतकरी संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि किसानों की जमीन केवल जमीन का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि उनके परिवार की आजीविका, आर्थिक सुरक्षा और भविष्य का आधार है। ऐसे में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए और किसानों को बाजार मूल्य के अनुरूप उचित एवं न्यायसंगत मुआवजा दिया जाना चाहिए।
किसानों ने प्रशासन से मांग की कि प्रभावित किसानों के साथ तत्काल बैठक आयोजित कर उनकी आपत्तियों एवं शिकायतों पर चर्चा की जाए। साथ ही, जब तक उचित मुआवजे पर निर्णय नहीं लिया जाता और किसानों को विश्वास में नहीं लिया जाता, तब तक ड्रोन-जीपीएस सर्वेक्षण, सीमांकन एवं मार्किंग की कार्रवाई तत्काल रोकी जाए।
किसानों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो भूमि अधिग्रहण के मुद्दे को लेकर किसान संगठन आगे भी आंदोलनात्मक भूमिका अपनाने के लिए मजबूर होंगे।


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