पत्थरों की बारिश से भड़का गोंडेगांव
WCL की मिट्टी ढुलाई ठप, सैकड़ों ग्रामीणों का ठिय्या आंदोलन; अब आमरण अनशन से बढ़ा संघर्ष
ओवरब्रिज से गिरे बड़े पत्थर, दो महिलाएं बाल-बाल बचीं; वाहन का कांच टूटने का दावा
पुनर्वसन के 167 परिवारों का मुद्दा भी गरमाया, ग्रामीण बोले—स्थायी समाधान तक नहीं चलेगी मिट्टी ढुलाई
कन्हान : - नागपुर जिले की पारशिवनी तहसील अंतर्गत गोंडेगांव में वेकोलि (WCL) की मिट्टी डम्पिंग और परिवहन व्यवस्था के खिलाफ ग्रामीणों का आक्रोश बुधवार (दि. 30 सितंबर) को खुलकर सामने आया। पुराने गोंडेगांव मार्ग पर बने ओवरब्रिज से मिट्टी ले जा रहे भारी वाहन से बड़े पत्थर नीचे गिरने की घटना के बाद ग्रामीणों ने परिवहन का रास्ता रोक दिया और ठिय्या आंदोलन शुरू कर दिया। आंदोलन के चलते गोंडेगांव की ओर जाने वाले मिट्टी से भरे टिप्पर मौके पर खड़े रह गए और परिवहन ठप हो गया। स्थानीय रिपोर्ट में भी सैकड़ों ग्रामीणों द्वारा रास्ता रोकने तथा मिट्टी ढुलाई बंद होने की पुष्टि की गई है।
ग्रामीणों के अनुसार, ओवरब्रिज के नीचे से दोपहिया वाहन से गुजर रहीं सुशीला पाटील और कल्पना इरपाते के पास अचानक बड़े पत्थर आकर गिरे। दोनों महिलाएं बाल-बाल बचीं तथा मामूली चोट लगने की जानकारी सामने आई है। इसी दौरान एक वेकोलि वाहन पर भी पत्थर गिरने से उसका कांच टूटने का दावा ग्रामीणों ने किया है। ग्रामीणों का आरोप है कि ओवरब्रिज से लगातार भारी और मिट्टी से लदे वाहन गुजर रहे हैं। वाहनों से मिट्टी एवं पत्थर नीचे गिरने के कारण पुल के नीचे से गुजरने वाले नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले भी इस मार्ग पर ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था का स्थायी समाधान नहीं किया गया।
सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र बुधे ने आरोप लगाया कि पुल के दोनों ओर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था और सुरक्षा दीवार नहीं होने के कारण वाहन से गिरने वाली सामग्री सीधे नीचे आने का खतरा बना रहता है। उन्होंने कहा कि भारी वाहनों की आवाजाही से सड़क की स्थिति भी खराब हो रही है और ओवरलोड परिवहन से मिट्टी-पत्थर गिरने की समस्या बढ़ रही है। उन्होंने वेकोलि के वरिष्ठ प्रबंधन से घटनास्थल की स्थिति का जायजा लेकर नागरिकों की सुरक्षा के लिए तत्काल ठोस उपाय करने की मांग की।
आंदोलन के दौरान पुल के पास तैनात वेकोलि सुरक्षा कर्मियों के साथ ग्रामीणों की बहस होने की जानकारी सामने आई। विवाद बढ़ने पर कुछ लोगों द्वारा सुरक्षा कर्मी के साथ मारपीट किए जाने की भी सूचना है। इसी दौरान पुलिस के साथ धक्का-मुक्की अथवा हाथापाई की स्थिति बनने की जानकारी भी सामने आई है। इन घटनाओं की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि समाचार लिखे जाने तक स्पष्ट नहीं थी। घटना की जानकारी मिलते ही एसडीपीओ शशांक गौड़ा और पुलिस निरीक्षक वैजयंती मंडवधरे पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तथा दंगा नियंत्रण दल को भी तैनात किया गया।
167 परिवारों के पुनर्वसन का सवाल फिर ऐरणी पर
मिट्टी परिवहन के विरोध के साथ ही जुने गोंडेगांव के वर्षों से लंबित पुनर्वसन का मुद्दा आंदोलन का प्रमुख विषय बन गया है। ग्रामीणों के अनुसार, पुनर्वसन का प्रश्न करीब दो दशक से अधिक समय से लंबित है। कुछ परिवारों का पुनर्वसन हुआ है, जबकि अनेक परिवार अभी भी उचित मोबदले और पुनर्वसन की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
ग्रामीणों का दावा है कि 167 परिवारों का पुनर्वसन अब भी लंबित है। ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में पुनर्वसन के लिए प्लॉट उपलब्ध कराना, वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप बढ़ा हुआ मोबदला देना तथा पूरे मामले का स्थायी समाधान करना शामिल है। स्थानीय प्रकाशित रिपोर्ट में भी 167 परिवारों के पुनर्वसन का दावा दर्ज है।
गोंडेगांव ग्राम पंचायत की सरपंच मनीषा दलाल आंदोलन स्थल पर पहुंचीं और ग्रामीणों से चर्चा की। उन्होंने कहा कि जुने गोंडेगांव पुनर्वसन का मुद्दा लंबे समय से लंबित है और पिछले चार वर्षों से वे लगातार इस मामले का प्रशासन तथा संबंधित अधिकारियों के समक्ष पाठपुरावा कर रही हैं।
उनके अनुसार, इस मुद्दे पर कई बैठकें हुईं, अधिकारियों ने गांव का दौरा भी किया, लेकिन अब तक ठोस समाधान नहीं निकला। उन्होंने कहा कि 30 सितंबर की पत्थर गिरने की घटना ने नागरिकों में भय और आक्रोश पैदा किया है। सरपंच ने सवाल उठाया कि यदि पत्थर किसी व्यक्ति के ऊपर गिरता और जनहानि होती, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता? उन्होंने जुने गोंडेगांव के पुनर्वसन का प्रश्न तत्काल हल करने की मांग की है।
अशोक दलाल बोले—प्लॉट और बढ़ा हुआ मोबदला मिले
ज्येष्ठ समाजसेवक अशोक दलाल ने बताया कि बुधवार शाम पत्थर गिरने की घटना के बाद ग्रामीण एकजुट हुए और आंदोलन शुरू किया। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की प्रमुख मांग गांव का तत्काल पुनर्वसन, पुनर्वसन प्रभावित परिवारों को प्लॉट तथा वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार बढ़ा हुआ मोबदला देना है। उन्होंने बताया कि इन मांगों को लेकर रामटेक के एचडीओ प्रियेश महाजन को लिखित निवेदन दिया गया। महाजन ने जल्द संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक लेकर मामले पर चर्चा करने का आश्वासन दिया। अशोक दलाल के अनुसार, ग्रामीणों का कहना है कि वेकोलि और गांव के सभी नागरिकों के सामने चर्चा कर जो निर्णय लिया जाएगा, उसे स्वीकार किया जाएगा. लेकिन प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय होने तक आंदोलन जारी रखने का निर्णय ग्रामीणों ने लिया है।
आंदोलन स्थल पर पहुंचे एच डी ओ प्रियेश महाजन
गुरुवार (दि. 1 अक्टूबर) को रामटेक के एचडीओ प्रियेश महाजन आंदोलन स्थल पर पहुंचे और ग्रामीणों से चर्चा की। उन्होंने ग्रामीणों द्वारा उठाए गए पुनर्वसन संबंधी मुद्दों को गंभीरता से सुना।
प्रियेश महाजन ने कहा कि ग्रामीणों द्वारा उठाए गए अधिकांश मुद्दे वेकोलि से संबंधित हैं। उन्होंने कहा कि वेकोलि अधिकारियों के साथ तत्काल बैठक लेकर मामले में रास्ता निकालने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीणों के प्राथमिक मुद्दे प्रथमदृष्टया उचित दिखाई देते हैं, लेकिन अंतिम निर्णय वेकोलि अधिकारियों के साथ चर्चा और आवश्यक पुष्टि के बाद ही लिया जाएगा।
ग्रामीणों के अनुसार, गुरुवार को प्रशासन और वेकोलि अधिकारियों के साथ बैठक होने की उम्मीद थी। प्रियेश महाजन मौके पर पहुंचे, लेकिन वेकोलि के संबंधित अधिकारी बैठक के लिए उपस्थित नहीं हुए, जिससे आंदोलनकारियों में नाराजगी और बढ़ गई। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से बैठकों और आश्वासनों का दौर चल रहा है। अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि लिखित एवं ठोस निर्णय चाहिए।
ठिय्या आंदोलन के बाद आमरण अनशन
बुधवार शाम पत्थर गिरने की घटना से शुरू हुआ आंदोलन गुरुवार को और गंभीर रूप ले गया। ग्रामीणों के अनुसार, प्रशासन के साथ चर्चा से तत्काल समाधान नहीं निकलने के बाद आंदोलन स्थल पर पंडाल लगाकर आमरण अनशन शुरू करने का निर्णय लिया गया। शंशदूसरी ओर, गोंडेगांव की ओर मिट्टी परिवहन करने वाले वेकोलि के वाहन बुधवार शाम से ही खड़े बताए जा रहे हैं। इससे मिट्टी डम्पिंग एवं परिवहन का काम प्रभावित हुआ है।
जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति पर भी ग्रामीणों में नाराजगी
आंदोलन के दौरान क्षेत्र के प्रमुख जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति को लेकर भी कुछ ग्रामीणों ने नाराजगी जताई। ग्रामीणों के अनुसार, सांसद श्यामकुमार (बबलू) बर्वे और राज्यमंत्री आशीष जयस्वाल आंदोलन स्थल पर नहीं पहुंचे। ग्रामीणों का कहना है कि नागरिकों की सुरक्षा और वर्षों पुराने पुनर्वसन के मुद्दे पर संबंधित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों से सीधे संवाद करना चाहिए।
“स्थायी समाधान होने तक मिट्टी परिवहन नहीं होने देंगे”
ग्राम पंचायत सदस्य साहिल गजभिये ने कहा कि ओवरब्रिज से उत्खनन की मिट्टी का परिवहन किया जा रहा है और इससे नागरिकों की सुरक्षा पर खतरा बना हुआ है। कई बार संबंधित अधिकारियों के सामने समस्या रखने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं हुआ।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक नागरिकों की सुरक्षा और पुनर्वसन के मुद्दे का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक ग्रामीण मिट्टी परिवहन नहीं होने देंगे।
अब WCL प्रबंधन पर निगाह
गोंडेगांव में एक ओर ओवरब्रिज से पत्थर गिरने की घटना ने नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, वहीं दूसरी ओर वर्षों से लंबित पुनर्वसन का मुद्दा भी आंदोलन के केंद्र में आ गया है। WCL की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, कंपनी नागपुर क्षेत्र सहित विभिन्न कोयला क्षेत्रों में संचालन करती है और अपनी सार्वजनिक सामग्री में सुरक्षा, पर्यावरण तथा समुदाय की भागीदारी पर भी जोर देती है।
ऐसे में गोंडेगांव के ग्रामीणों का सवाल है कि जब तक मौके पर सुरक्षित परिवहन व्यवस्था, पुल की सुरक्षा तथा पुनर्वसन के लंबित प्रश्न पर ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन उठाएगा?
समाचार लिखे जाने तक गोंडेगांव में मिट्टी परिवहन बंद था और ग्रामीण आंदोलन पर डटे हुए थे। अब सबकी नजरें WCL प्रबंधन और प्रशासन की अगली ठोस कार्रवाई पर टिकी हैं।सह संपादक - ऋषभ बावनकर


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